Saturday, December 29, 2018

देश भक्ति पर कविता

            ''शान बनाए रखना''

भारत में सुन्दरता बहती है
नदियाँ भी गीत सुनाती हैं
ये देश है वीर जवानों का
जिसका दुनियाँ गुण गाती है,

रंग रूप बदलते रहते हैं
     अंजाम बदलते रहते हैं
भारत सोने की चिङिया है
  सोने सी ही चमक वो रखते हैं,

  भारत को रंगीन बनाया है
   वीरों ने अपना लहू बहा करके
इसकी शान बनाए रखना है
           अपना शीश कटा करके,

देशभक्ति से ओत-प्रोत
     हम सब भारतवासी हैं
दुश्मन को धूल चटाने को
       हम अकेले ही काफी हैं,

~ युवा लेखक/कवि
शिवम यादव अन्तापुरिया

जिंदगी और मौत की वार्तालाप

.जिंदगी से मौत और मौत से जिंदगी की वार्ता.

मौत जिंदगी से हँसकर बोली
अरे री मैं हूँ तेरी सहेली,

दुनियाँ हमसे करती है नफरत
पर तुमको बना लेती है पहेली,

जिंदगी के मेरे जीवन कुछ
   इरादे और ख्वाब होते हैं
   तेरी वजह से जीवन के
हर वादे भी पूरे नहीं होते हैं,

मौत ने कहा मैं गरीब-अमीर
दोनों को समान देखती हूँ
तुम दोनों को भिन्नता से,

आखिर दुनियाँ का कङुवा
    सच तो मैं हूँ...
बस यही कारण है
मुझे लोग दुतकारते हैं
   तुम्हें पुचकारते हैं,

मनुष्य से सम्मान
पाने के बाद भी..
तुम उन्हें वो जगह
नहीं दे पाती हो,

दुतकारने के बावजूद भी
मैं उन्हें स्वर्ग पहुँचा देती हूँ...

~ युवा कवि/लेखक
शिवम यादव अन्तापुरिया

शायर जीवन पर

न लाख मेरा होगा, न एक मेरा होगा
बस कुछ कर दिखाने वालों में
          नाम मेरा होगा....

शायर शिवम यादव अन्तापुरिया

क्या नाम दूँ

         ! क्या नाम दूँ !

   क्या किसी को नाम दूँ
एक न एक दुःखङा उसके नाम है,

कोई हँसकर काटता है
कोई पिए मुसीबत का
       जाम है,
ढलता सूरज जिस तरह
जिंदगी उसका नाम है,

दर्दोंषको हँसकर हैं
सहते
साहस इसी का नाम है,

है किसी का काम अच्छा
   तो किसी का नाम है,

    रहता है वो भी यहीं पर
   लेकिन वो तो
अपने कारनामों से बदनाम है,

   ~ लेखक/कवि
शिवम यादव अन्तापुरिया
मुश्किल में कविराय

* गजल *

               । चल दिए हम।

चल दिए हम घूम करके
           लक्ष्य को पाने को....-2

न मिला है वो किनारा
          दूर तक जाने को
था अजीब वो वक्त मेरा
           तुमको भूल जाने को
चल दिए हम घूम करके
            लक्ष्य को पाने को....-2
था मुकम्बल मुझको पाना
           चाहें कहो मिटाने को
रो रोकर हँसने लगे
        प्यार तेरा निभाने को
चल दिए हम घूम करके
    लक्ष्य को पाने को...-2
जीत में भी हार ले ली
           तेरा दिल बचाने को
दर्दों से नाता जोङा
   तुमको सुकूँ दिलाने को
चल दिए घूम करके
       लक्ष्य को पाने को...-2
दर्द भी हटता नहीं
     बिन मरे जल जाने को
चल दिए हम घूम करके
          लक्ष्य को पाने को...-2

~  लेखक/कवि
शिवम यादव अन्तापुरिया

शायर

तसल्ली पाकर भी सुकूँ नहीं मिला ।
हौसलों ने मुझे रूकने भी नहीं दिया ।।

    काँच के महल में झरोखे दिखने लगे
ऐसा मुकाम ही क्या जो "अन्तापुरिया" अपने
            बिछङने लगे,