I am a Poet & Writer . मैं काव्य-संग्रह और मुक़्तक लिखता हूँ I मुझे लिखने में मज़ा आता है , धन्यबाद I
Tuesday, January 15, 2019
Tuesday, January 8, 2019
प्यार को खुले बाजार न कर
ऐ शिवम इस प्यार
को खुलेबाजार न कर
वो जैसा है बना रहने दे
तू तो जरा लिहाज कर
3 "इश्क है उसे"
91- उससे बिछङ करके हम
इश्क में रोज मरते हैं
और रोज जीते हैं,
92- आज फिर उससे मुलाकात हुई
वो मेरी आँखों में
आँखें डाल कर न जाने
क्या कहना चाहती थी
तब तक मैंने नजर ही फेर ली,
93- अब इश्क व्यापार सा
हो गया है
जितना इन्वेस्ट करो
वही तुम्हारा हो गया है,
94- उसे इश्क है इश्क की
तामील होनी चाहिए
शिवम जो हैं इश्क के रोगी
उनकी खोज होनी चाहिए,
95- इस जिंदगी में सुकूँ में रहना
सीख लो
कौन किसका क्या है
इससे दूर रहना सीख लो
96- हम तो जीत कर भी हार मान लेंगे
जिस दिन वो मुझे अपना दीवाना मान लेंगे,
97- वो तन्हाइयों का सफर काटे नहीं कटता
इश्क क्या है वो समझाए भी नहीं समझता,
98- इश्कें तूने मेरे हजारों शिकार किए होंगे
अब तू भी बता दे मैंने तुझसे कितने इजहार किए होंगे,
99- कोई मिलने को रोकता है
कोई मिलकर के रोता है
प्रेमी की धङकन को तो बस
प्रेमी समझता है,
100- उठा ले खंजर तू हाथों में और चला दे ऊपर
एक आवाज तक न निकलेगी मेरी
आवाज बस निकलेगी खंजर की तेरी,
101- बे दौलत है वो तो क्या हुआ
चलो उसके दिल में इश्क का खजाना तो है,
102- आजकल इश्क को रेत का महल ही
समझो
वक्त बिगङते ही ये जमीं पर फैल जाते हैं,
103- तू है क्या दुनियाँ को क्या पता
ओ इश्क के मुशाफिर अपना नाम तो बता,
104- एक सलाह दूँ या मशविरा
तू कुछ भी कर मगर इश्क से तुझे दूर ही रखूँगा,
105- अपने इश्क को तू सर बाजार न कर
मुझे बाजारू चीज समझकर सौदा न कर,
106- है लहू में उबाल तो करके दिखाऊँगा
इश्क हो या दुश्मनी भरपूर निभाऊँगा,
107- इश्क जितना प्रेम करता है
उससे कई गुना ज्यादा वो नफरत भी करता है,
108- जा तुझे अपनी नजरों से आजाद करता हूँ
मगर शर्त है तू भी मुझे अपने दिल से रिहा कर दे,
109- इश्क में वो क्या क्या सहेगा
तू जहर देगा वो, वो भी पिएगा,
110- तू आज एक सच्चा फैसला सुना दे
मुझे रूला दे या हँसा दे,
111- ओ मेरे प्यार का पंचनामा इस कदर न कर
इस सजा से बेहतर कि मुझे जिंदा ही जला दे,
112- मुझे मुझसे छीनने की कोशिश न कर
अभी जिंदा हूँ काफिर मुझे मुर्दा न समझ,
113- इश्क में तेरी तरफदारी अच्छी नहीं
मुझे नफा हो या नुकसान इसका मुझे डर नहीं,
114- साहब!
इश्क है ये चुनाव नहीं, जो तू मुझे जनमत दिखाने आया है
हाँ तू खूबसूरत है मगर दिल नहीं,
115- तेरे प्यार का सूखा टूटा कहाँ
वर्षों से बारिश ने मुझको देखा कहाँ
हम तो बेउम्मीद जीते रहे
जिंदगी ने मुझको परखा कहाँ,
116- तेरी इजाजत का मुझे नशा भी नहीं है
तू इश्क में करता क्या है इसका पता भी नहीं है,
117- साहब!
जब गरीबी जेब में दस्तक देती है
तब
मोहब्बत अपने आप आँखों से निकल जाती है,
118- हार से मुझे प्यार है नफरत नहीं
क्योंकि
मैं जिससे प्यार करता वो मेरे पास रहता नहीं,
119- तेरे गम में पिछले दिन याद आने लगे
जो बिन देखे नहीं रहते थे वो मुँह फेर कर जाने लगे,
120- गुनाह सह लेंगे जहर पी लेंगे
बिछङकर भी जीलेंगे
लेकिन कभी अब जीवन में
प्रेम का निमंत्रण नहीं लेंगे,
121- हम भी कभी खुशदिल हुआ करते थे
उसके प्रेम की राह पर क्या चले
उन खुश होंठो की मुस्कराहट न जाने कहाँ जा बसी,
122- मैं शायद इश्क माफिक नहीं
कम से कम तुम तो अच्छे से निभाओ,
123-जिस गली से हम एक बार गुजर जाते हैं
उससे दुबारा गुजरने की आदत नहीं मेरी,
124- ऐसा नहीं है कि तुम न रहो तो तुमको
भूल जाएँगे
हम तो दफन हो जाएँगे
मगर तस्वीरें सलामत रख जाएँगे,
125- तेरी खामोशी से घायल भी पागल हो जाते हैं
तेरा नशा ही ऐसा है बिन पिए भी पिए नजर आते हैं,
126- जरा सी बात पर तेरा मचलना भी ठीक लगता है
इजहारे इश्क में उसको चाहना भी ठीक लगता है
127- मुझे सुकूनियत का चैन कहाँ मिलता
जब तक तू मूझे अपने नाम नहीं करता,
128- जो इंतजार नहीं याद करते हैं
हम इस दुनियाँ में उसी को सच्चा प्यार कहते हैं,
129- जिसमें मन से मन तक ही प्यार का इजहार हो
उसी को सच्चे प्यार का नाम दो,
130- टूटा हुआ शीशा गहरे जख्म दे जाता है
तो नफरत करते है
बिन टूटा शीशा कितना सुन्दर लगता है,
वो नफरत मोहब्बत दोनों को रखता है,
131- तू मिला तो मूझे दरिया का किनारा मिल गया
मकानों आसमान को जमीं का सहारा मिल गया,
132- तेरे साथ की उम्मीदों का सिलसिला रहेगा
वो रहे न रहे उसका फरमान जारी रहेगा,
133- साहब!
बेवफाई तो लङकियों ने करना शुरू किया था
लङके तो इसका नाम न जानते थे,
134- ये तेरी ही कोशिश है
जो बना तू अजीज आशिक है,
135- जिंदगी का सफर अकेले भी अच्छा नहीं लगता
कोई बिछङ जाए तब भी अच्छा नहीं लगता
जिंदगी में जो दखल डाले वो साथ भी अच्छा नहीं लगता,
~ शिवम अन्तापुरिया शायर
मौत से भी दो दो हाथ
जिस दिन मौत आएगी मुझे
उससे भी दो दो हाथ
हो जाएँगे मेरे
हार हो या जीत हो
जिसका जरा सा
भी न होगा सोच मुझे
जीता तो भी मैं उसका
हार गया तब भी हूँ उसका
जा चला जा दुश्मनी के साथ
तू "अन्तापुरिया"
आगे मिलेगा प्यार का रास्ता
~ शिवम अन्तापुरिया
Saturday, January 5, 2019
"अनजाने में" जो अनजाने में हुआ है मुझसे, वो तुम ...
जो अनजाने में हुआ है मुझसे
वो तुम जानबूझ न कर देना
हम तो अब मर जाएँगे
तुम खुद को जिंदा दफन न कर देना
ये भरत भूमि है जन्मभूमि है
ये मिट्टी सर मस्तक पर रखना है
लाज बचाने को भारत माँ की
तुम अपना शीशे भले ही कटा देना
जो अनजाने में हुआ है मुझसे
वो तुम जानबूझ न कर देना
यही भरत भूमि है नाम हमारा
मिट्टी का कण कण मेरी शान है
देश के खातिर खून बहाना
बनी मेरी पहचान है
रीति रिवाज और धर्म मर्यादा
लगी सैकड़ों आन हैं
ये भारत देश की मिट्टी है
जहाँ जन्म लेते श्री कृष्ण और राम हैं
शिवम यादव अन्तापुरिया
उत्तर प्रदेश
भारतीय संपदा के साथ
देशभक्ति पर आधारित
अटल दृढ़
भरतभूमि है जन्मभूमि तो डरना क्या
बस आगे बढ़ते जाना है
वीर शहीदों की शहादतों को सबको याद दिलाना है
याद करो उस वीरांगना को
जिसका नाम रानी अवंतीबाई था
धूल चाट दी थी दुश्मनों को
दुश्मन दल में मचा त्राही त्राही था
याद करो उस शहीद भगत को
जिसका अंतिम निर्णय भी
हँसते-हँसते फाँसी था
जिसकी महज एक गरजे में
दुश्मन दल हिजङा सा बन जाता था
ये कर्म भूमि है युद्ध भूमि
इससे विचलित होना न
कितने भी तूफाँ तुमसे टकराएँ
सरहद से तुम हटना न
नाज देश को सिर्फ तुम पर है
इसकी आन बनाए रखना तुम
हार जीत तो सिर्फ एक यात्रा है
लेकिन अपने दृढ़ को अटल ही
रखना तुम....
~ ओज/हालात रस का कवि
शिवम यादव अन्तापुरिया
9454434161
"भारत की शान तुम्हीं से है"
भारत की शान तुम्हीं से है
भारत की आन तुम्हीं से है
तुम भारत माँ के रखवाले हो
भारत को अभिमान तुम्हीं से है
तुम वीर बहादुर रणबांकुणे हो
तुम भारत के रथ के सारथी हो
तुम लङने मरने से न डरते हो
क्योंकि तुम भरतभूमि के वासी हो
भारत की जान तुम्हीं में है
भारत का स्वाभिमान,सद्भाव तुम्हीं में है
भारत का शीश (तिरंगा) तुम पर है
तुम तिरंगा में ही बसते हो
अन्तापुरिया ये कहता है
आसमान में सदा तिरंगा लहराता रहे
क्योंकि तुम तिरंगा पर जान छिङकते हो
ओज/हालात रस का कवि
रचनाकार-
शिवम यादव "अन्तापुरिया"
9454434161