Wednesday, July 10, 2019

तेरे दिल शेर

आशिक तेरे दिल में बसते गुज़रते,
हम तो सुबह शाम रहते हैं ज़गते,

शिवम अन्तापुरिया

Tuesday, July 9, 2019

झोंका

"झोंका हूँ"

ये सावनी बयार है
कर रही पुकार है
बह रहा झोंका सा मैं
  गिर रहे फ़ुहार हैं...

    है हवा बहार में
   हो रहा गुलज़ार मैं
किस तरह बताऊँ उसको
वो बारिश का ही सुकुमार है ...

बन हवा का झोंका मैं
फ़िर कर दिया आह्वान है
  है जरुरत बन जरूरत
     कर रहा पुकार है ...

युवा कवि/लेखक
शिवम अन्तापुरिया

Sunday, July 7, 2019

तन्हाँ खड़े हैं

"तन्हाँ खड़े हैं"

कभी हाथ उनके थे
कभी हाथ मेरे
सफ़र जिंदगी के थे
बहुत ही टेड़े...

जब जब चला मैं
गिरता रहा हूँ
गिरकरके उठता
सँभलता रहा हूँ...

मेरा शौक जीना ही
  मंजिल नहीं है
  दुनियाँ बिगड़ती जाए
ये मुझको मुनाशिफ नहीं है..

मुझे देखकर तुम जिओगे कैसे
   हम तो हजारों में भी
      तन्हाँ खड़े हैं...

शिवम अन्तापुरिया

पतंगे जानकर भी
सम्माँ के पास आते हैं
गवाने जा रहा हूँ जान
       "अपनी"
ऐसी खुशियाँ मनाते हैं

शिवम अन्तापुरिया

Saturday, July 6, 2019

दिल दर्द भी है
दिल दवा भी है
क्या बताऊँ इस
शहर के लिए दिल
हवा भी है

शिवम अन्तापुरिया
हमे फ़ुरसत ही कहाँ है खुद से,
रहते हैं हमेशा काम करते,
हम कैसे बसें तुम्हारे दिल में,
हम चलते ही हैं रुकते रुकते,

शिवम अन्तापुरिया
उत्तर प्रदेश (भारत )

गूलरे पक गयी भुने भुने आ गए
मानो चाहत के सारे ख्वाब मिल गए
शिवम अन्तापुरिया

Thursday, July 4, 2019

कविता मची खलबली

"मची खलबली"

घिरे बादलों की
भूख बस यही है
ज़मीं भीग जाए
कमी बस यही है
घिरे घनघोर बादल
उमड़ ही रहे हैं
जिन्हें देखकर दिल
में मची खलबली है

आशाओं की किरणें
हिलोरें भर रहीं हैं
मन की मनोदशा
शिथिल हो रही है
मेरी साँस रूकती
बिखरती जा रही है
लगा जैसे मेरी साँसे
बारिश की बूँदों से
जुड़ती जा रहीं हैं

युवा कवि/लेखक
शिवम अन्तापुरिया
उत्तर प्रदेश
भारत
गूलरे पक गयी भुन भुन आ गए
मानो चाहत के सारे ख्वाब मिल गए
शिवम अन्तापुरिया

बिना मर्ज़ी सबके घरों में घुस जाऊँगा
     जो देखना भी न चाहते थे
     उनके ही खरीदे अखबार में  
                     जब छापा जाऊँगा

शिवम अन्तापुरिया

ऎ उमड़ता हुआ बरश जा बादल,
या फ़िर जा चला चला जा बादल,
शिवम अन्तापुरिया

Sunday, June 30, 2019

अधूरा इश्क के शैर

हमारे प्यार में जीकर
अधूरे ख्वाब में रह लेना ...
टूटे सपनो से सज़कर
कभी तन्हा भी जी लेना...

--शिवम अन्तापुरियाअधूरा इश्क है तेरा
हमारा नाम लो चाहें
मैं तुझसे हार करके भी
तुझको हार पहनाऊँ

कोई चाहत में मुझको
खोजकरके
गुम हो जाता है
मैं हूँ प्रेम का तिनका
प्रेम में बहता जाता हूँ..

~  शिवम अन्तापुरिया

शैर

वो इश्क की फ़रियाद में खुद में
खुद को भिगोता रहा,
मैं अकेला खुद को अकेला
ही महसूस करता रहा

शिवम अन्तापुरिया