Tuesday, September 17, 2019

2- अन्तापुरिया की शायरी

"शिवम अन्तापुरिया की शायरी"

चलो हम सब मिलकर
आज कुछ नया करते हैं
नजरें मिलाकर गैरो को
अपना करते हैं

किसी के साथ रहकर  जिंदगी गुज़ार लेना
मगर अकेले कभी मत रहना

सारे गम भुलाकर अपने में खो जाना
मगर इस दुनियां से कुछ भी न छुपाना

गलतियों से मुझे सीख मिलती गई...
जिन्दगी कोरे पन्नों पर लिखती गई...

आजकल लोग मुझसे न जाने क्यों
उम्र पूँछ रहे हैं
क्या उम्र के सहारे ही
रिश्ता जोड़ रहे हैं

कोई अल्फ़ाज़ में मेरे खुशी के गीत गाता है
चलो हम दूर रहते हैं कोई तो मुस्कुराता है
यहाँ की महफ़िलो में हम अकेले शख्स हैं ऐसे, जो गमों के ज़ाम पीकरके खुशी के गीत गाता है

वो घूम रहा है प्रेम पत्र का समर्पण हाथों में लिए
दुश्मन रुपी घूम रहे हैं उसके पीछे हाथों में तलवार लिए

किसी के दिल की मायूसी हमारे साथ रहती है
वो दिनभर तो हँसती है
शाम को उदास रहती है

तेरी चाहत को बड़ी गहरी खदानो में पाया,
हुआ कितना नफ़ा और नुकसान न जाना,

इश्क में खामियाँ उसके पाई नहीं...
बीच में मेरे क्यों दूरियाँ
हैं बनीं...
जिंदगी के बिना चैन थम जाएगा,
नींद बिन साथ सोए है आती नहीं...

मुझे न तेरी फ़िकर
उसे न मेरी फ़िकर
बस हर रोज़ करते ही रहो जिकर

- शिवम अन्तापुरिया
    उत्तर प्रदेश

Saturday, September 14, 2019

तुम्हारे हाथ में हमने अपनी लगाम न दी होती |

".नज़्म."
इश्क में खामियाँ उसके पाई नहीं...
बीच में मेरे क्यों दूरियाँ
 हैं बनीं...
जिंदगी के बिना चैन थम जाएगा,
नींद बिन साथ सोए है आती नहीं... 

शिवम अन्तापुरिया

झोंझ

*एक झोंझ की आकृति में*
        
        "झोंझ"

  कितना सुन्दर घर है
जिसको कहते झोंझ हैं
तिनका-तिनका चुनकरके
  खूब सजाती झोंझ है

  जरा सहारा डाल का
   ईंट गारा सूखे-साखे
     खरपतवार का
बड़ी लगन और मेहनत
     से कर डाला
  निर्माण है झोंझ का

        कितना
    सुन्दर कितना
    मनमोहक है
बनता जाता झोंझ
है जुगनूँ की मिट्टी
   से देखो चमक
     भी उठता
      झोंझ है

रंग बिरंगे
नील गगन
में खाते
रहता गोते है
जरा सहारे
एक लकड़ी के
झूमता रहता
  झोंझ है

शिवम अन्तापुरिया
   उत्तर प्रदेश

ये मुझे क्या पता

" ये मुझे क्या पता "

कोई चल रहा है
  ये मुझे क्या पता
   मैं भी चल रहा हूँ
   ये मुझे क्या पता
  जिन्दगी भी वसंत
बनकर खिलखिला रही है
   ये मुझे क्या पता

  ओह जिन्दगी तेरे
   पास आ रहा हूँ
  मेरा भी साथ देना
  बता कर आ रहा हूँ
  अब तुम न कहना
   ये मुझे क्या पता

  कुछ हाल सही
कुछ हाल बेहाल
सुनाऊ जिन्दगी के
अब तुम्हें क्या हाल
सब कुछ बेहाल है
ये मुझे क्या पता

~ शिवम अन्तापुरिया
      उत्तर प्रदेश

दिल ही क्यों


कवि के नाते कविताएं लिखता हूँ
शायर के नाते शायरी लिखता हूँ
और हाँ
लेखक के नाते डायरी लिखता हूँ

मुझे अब बहुत दूर जाना
वहां कुछ करके आना है

गाँव ही मेरा घर है
गाँव ही मेरा जिला है
गाँव ही मेरा प्रदेश है
गाँव ही मेरा देश है
यहाँ तक की मेरा गाँव ही मेरे लिए विदेश है

अपने व हमारे शरीर में बहुत सारे महत्व पूर्ण अंग हैं फ़िर भी प्रेम में लोग दिल से ही क्यों चाहते हैं
जरा फ़ेफ़डे से भी चाह लिया करो
कोई भी उत्तर दे सकता है

मुझे न तेरी फ़िकर
उसे न मेरी फ़िकर
बस हर रोज़ करते ही रहो जिकर

©®शिवम अन्तापुरिया

तेरी चाहत को बड़ी गहरी खदानो में पाया,
हुआ कितना नफ़ा और नुकसान न जाना,

शिवम अन्तापुरिया

".नज़्म."
इश्क में खामियाँ उसके पाई नहीं...
बीच में मेरे क्यों दूरियाँ
हैं बनीं...
जिंदगी के बिना चैन थम जाएगा,
नींद बिन साथ सोए है आती नहीं...

शिवम अन्तापुरिया

वो घूम रहा है प्रेम पत्र का समर्पण हाथों में लिए
दुश्मन रुपी घूम रहे हैं उसके पीछे हाथों में तलवार लिए

शिवम अन्तापुरिया

आज फूल खिल रहे है
    हम  कवियों के लिए
हिन्दी हैं हम कवि
   हिन्दी के लिए

कवि शिवम यादव

किसी के दिल की मायूसी हमारे साथ रहती है
वो दिनभर तो हँसती है
शाम को उदास रहती है

अब तक तो सब कुछ ठीक था
  तेरे प्यार में रिचार्ज को करना
अब तुझे हो जायेगा मुश्किल
   मेरे चालान का भरना
   
देश हमारा धरती अपनी
हम धरती के लाल
कभी न झुकेगा हिन्दुस्तान
कभी न झुकेगा हिन्दुस्तान...

मोहब्बत के सफ़र में हम
तुम्हें यूँ मिल ही जाते हैं
सफ़र अन्ज़ाम तक पहुँचे
यही बस गुनगुनाते हैं
हमारा हाल क्या है यारों
ये मुझसे न तुम पूछो
मोहब्बत से सज़ी महफ़िल में
वो नफ़रत दिखाते हैं

कोई अल्फ़ाज़ में मेरे खुशी के गीत गाता है
चलो हम दूर रहते हैं कोई तो मुस्कुराता है
यहाँ की महफ़िलो में हम अकेले शख्स हैं ऐसे, जो गमों के ज़ाम पीकरके खुशी के गीत गाता है

मेरी यादें बचा के रखना
मेरी चाहत सज़ा के रखना
अब मैं जा रहा हूँ
अपने आँशू छुपा के रखना

भाई संग मन मुदित भयो
   खेलत खेलत न तंग भयो
      छोड़ मोय जब दूर गयो
          दिल मेरो व्याकुल है भयो

  शिवम अन्तापुरिया

पुराने सिस्टमों से हम
लड़ते-जूझते हुए आए
विरासत में मिली आजादी
को सँभालते हुए आए
किसी का दाँव भारी था
किसी का पेंच भारी था
सभी के दाँव पेंचों से
आखिर हम बचते हुए आए

भारत की मिट्टी ही
बनेगी अब मेरा चंदन
हम हैं देश के रखवाले
  करते हैं तुम्हें वंदन
माँ भारती की रक्षा में
आड़े सियासत अगर आई
तो हम तोड़ कर रख देंगे
सारे चक्रव्यूह के भी बंधन

जिन्दगी अब तुम्हारी हम ही हैं सनम
रूठ करके भी ऐसे न जाओ सनम
याद कर कर के खूब रोओगे सनम
जब हम जीवित धरा पर न होंगे शिवम

ये मोहब्बत शिवम तेरे काबिल नहीं...
लोग करते हैं सज़दा होते शामिल नहीं...

नज्म़
इश्क से वो मोहब्बत करने लगा
प्यार की राह में वो तो पलता रहा
   देखकर प्यार के रंग-रूप
         बदलते हुए...
खुद ही खुद से दूर वो तो जाने लगा
अब मोहब्ब्त में हम यूँ बताएं भी क्या
चाह दर चाह दर वो बदलता गया

राह एक ओर थी मेरे अरमानों की
दूसरी ओर वो पानी करता गयाΔ

मैं लिखने वाला था
बहुत कुछ याद में तेरी
मैं भूल ही गया सब
        कुछ याद में तेरी

ऐ समस्या तू भी देख ले लगकरके मेरे गले,
समझ पायेगी तू भी कैसा लगता है मेरे गले,

हरारतों और शरारतों से मेरा तो नाता रहा
मगर इन सबको मैं भुलाता रहा
मैं दुख दर्दो को सज़ाता रहा
दुनियां ने जो गम दिए भुलाता रहा

न तुम मिले
न हम मिले
जलती आग में
धुआँ उठता रहा

   मैं अपने खूब सूरत लब्ज़ से तेरी अदा लिख दूँ
मोहब्बत इश्क का कर्ज़ा है जिसको मैं अदा कर दूँ

दिल की उम्मीद से ख्वाब कमजोर थे...
   देखते वो रहे हम तो बेहोश थे...

शिवम अन्तापुरिया

Tuesday, September 10, 2019

देख कर

सस्ती होती शोहरते गर इस जमाने में
लोग लिए फ़िरते शोहरते हर घराने मेंजरूर आऊँगा हाथों में लिए
तेरे वो खत सारे
जो तूने भेजे सज़ा कर मेरे लिए
बहुत सारे प्यारे सितारे

मुझे हजारों की ज़रूरत कहाँ
रहते हैं हम अकेले कहाँ
अनगिनत हैं मेरे आलोचक
  जिनके निशाने से हम
      बचते हैं कहाँ


आजकल चल रहें हैं कुछ
    ऐसे पथों पर
जिनकी मन्ज़िल कहाँ
जिसकी खबर भी नहीं है
मगर चलने में कम नहीं है
हजारों कंकड़ों ने आकर
रोका मुझे, मगर हम बेहद
जिद्दी हैं
उसके कहने से
हम रुके ही कहाँ पर

देख देख कर मुझे कहाँ रंग चढ़ता है,
हम तो वो बेरन्गी दुनियां में जीते हैं,
जिसमें कभी रंग नहीं चढ़ता है
शिवम अन्तापुरिया

बारिश भी गुस्ताखियाँ किया करती है ।
हर पल में अपने चेहरे बदला करती है।।
...??

आधार है गुरु

"आधार है गुरु"

शिष्य की योग्यता का
  आधार है गुरु...
पावन बहती गंगा की
  धार है गुरु...
सत्य,न्याय,निष्ठा,प्रकाश
की ओर ले जाने वाला
मार्ग है गुरु...
उतार-चढ़ाव की स्थिति में
अपने लक्ष्य से विचलित न
होने देने वाला साहस
भी देता है गुरु...
हार और जीत को समदर्शी
दृष्टि से देखने वाली दृष्टि भी
देता है गुरु...
कोयले की खान में हीरे
  को पहचानने की
परख भी देता है गुरु...
यहाँ तक की सारी दुनियाँ
के गुरु का भी होता गुरु...

- शिवम अन्तापुरिया
     उत्तर प्रदेश
+91 9454434161