Thursday, December 13, 2018

!!सरस्वती वन्दना!!

    प्रातः काल
*सरस्वती वन्दना*
*.........................*
शुभ प्रभाते सरस्वती
           दर्शनम् अहं करोति,
संसारम् वन्दनम् करोति
           त्वम चरणं नवायम् शीश
    हे! वीणावरवादिनी
   स्वीकारोक्ति मम् प्रथम प्रणामि,
           *..:.:.:.:.:.:.:.:.:.:*
           * .:::::::::::::::::*
  शिवम यादव रामप्रसाद सिंह "आशा"
"अन्तापुरिया"
की
लेखनी से
         

किसान दुर्दशा

हाँफ कर भी श्वाॅस लेता है
सब उगाकर भी
      भूखा सोचता है,
   मन उमङता है,
चिल्लाता है,
खुद को समझाता भी है,

क्योंकि सुनाने के लिए
कोई पास नहीं होता है
जिंदगी की दौङ में
दौङकर भी सबसे
पीछे रहता है,

हाँ हाॅफ कर भी श्वाॅस लेता है ।

पानी की जगह
     तपती धूप में
खून को पसीना
    बनाकर बहाता है,

जरा सी प्रकृति की मार में
   वो अपने हाथों में
कुछ नहीं बचा पाता है,

हे भगवान! पूँछता हूँ आपसे

क्यों होती किसानों
की दुर्दशा है
जबकि सारा संसार
उन्हीं पर टिका है

हाॅफ कर भी श्वाॅस लेता है ।।

युवा लेखक/कवि
शिवम यादव अन्तापुरिया

Sunday, December 9, 2018

"सुनो मेरी रनियाँ"

कैसन लागी मेरे इश्क की झङियाँ ।
    सुनो मेरी रनियाँ-सुनो मेरी रनियाँ ।।

प्यार में तेरे मर मिट जाएँ
       बिना तुहरे हम जी भी न पाएँ,
कब तू बनैलू हमरी दुल्हनियाँ-2

सुनो मेरी रनियाँ-सुनो मेरी रनियाँ......

बफाई मेरे रंग रंग में बसी है
      तेरे बिना जीना न जिंदगी है..
तेरे बिना कैसे लूँ अंगडाइयाँ-2

सुनो मेरी रनियाँ-सुनो मेरी रनियाँ....

प्यार मेरा लिए बैठा इश्क की कहानियाँ
तू अनजान क्यों बने मेरी रनियाँ..
सुनो मेरी रनियाँ-सुनो मेरी रनियाँ...

कैसन लागी मेरे इश्क की झङियाँ ।
सुनो मेरी रनियाँ-सुनो मेरी रनियाँ ।।

लेखक/कवि/शायर
    शिवम यादव अन्तापुरिया

Thursday, December 6, 2018

2..."इश्क है उसे"

46-खाँमखाँ प्यार में
        इश्क की आङ में
धोखा देने में वो  
  तुमको कामयाब हो गया,

47-इश्क पर इश्क में ऐसे ही नहीं मैनें लिखा है
इश्क में हजारों दफा मुझे धोखा भी मिला है,

48- वो समझता मैं उसके इश्क का
प्यासा अब भी हूँ
साहब!
हम तो भूल भी गए हैं
उससे कब इश्क किया था मैंने,

49- इश्क में न जाने कितने
आशियानें खाक हो गए
हजारों नजरें छुपाकर
  वो हमारे हो गए,

50-हँसकर उसका मेरे पास आना
नंगे पाँव दौङकर आना
इससे साबित होता
वो मेरी दीवानी है,

51-ये इश्क है क्या
जो कभी तन्हाँ क्यों नहीं
रहता है
फिर ये दो लोगों को बिछङ
क्यों जाने देता है,

52-इश्क में रात छोटी भी बङी
लगती है
जब बङी होती है
तब तो तन्हाइयाँ ही तन्हाइयाँ
होतीं हैं,

53-जब दिल से इश्क का खेल
हर कोई खेल लेता है
फिर ये राष्ट्रीय खेल घोषित
क्यों नहीं होता है,

54-चलो इश्क पर गम का
पहरा लगा दें या
गम पर ही इश्क का
पहरा लगा दें,

55-मेरा इश्क से यूँ ही नाता
नहीं हो गया है
वर्षों तङपा हूँ
तब जाकर वो मेरा हुआ है,

56-इश्क की दुनियाँ रंगीन
सी लगती है
इश्क मिलकर खो जाए
तो जिंदगी गमगीन
सी लगती है,

57-खासकर जब अपना
दोस्त ही धोखा देता है
ज्यादातर इश्क में भी
ऐसा ही होता है,

58-हाँ तारीफ करता हूँ
उसकी जो मेरे बिन न रहती थी
न जाने क्या हो गया उसको
अब मुझे दुश्मन समझती है,

59-वो इश्क की गली से
मैं गुजरा ही कब था
फिर भी मुझे उसने
इतने प्यार से देखा क्यों था,

60-वो दरम्याँ गुजर गए
इश्क से बेकरार होकर
हम भी बिगङ से गए
प्रेम में मशगूल होकर,

61-हर वक्त मोहब्बत का
घूँट पीकर जिंदा हूँ
मगर ऐसे इश्क में जिंदा
भी मुर्दा हूँ,

62-इश्क में हजारों यादें
दफन सी हो गईं
      वो जी तो रहा है
मगर उम्मीदें तो
     कफन सी हो गईं,

63-मुझे कुछ शायर भी
कायर से नजर आने लगे हैं
क्योंकि अब इश्क से धोखे
भी हाथ मिलाने लगे हैं,

64-वो इतना इश्क क्यों
          कर बैठा था मुझे
अब प्यार में इश्क के
पत्थर क्यों मारने लगा मुझे,

65-अपनाए इश्क जिसको
जिंदगी वो सफल हो गई
न मिले इश्क उसकी सूनी
राहें हो गईं,

66-इश्क के रोग का सिला
भारी बीमारी है
जिसे हुआ नहीं उसका
संघर्ष जारी है,

67-तूफानों को दरकिनार
करते जाएँगे
मोहब्बत में उनके पथ
हम बनते जाएँगे,

68-ओ जिंदगी अब इतना
परेशाँ न कर
मैं हार, थककर बैठने
वाला भी नहीं,

69-हर मंजिल में इश्क
की भरपाई करनी है
जो मुझसे नाराज है
उनकी परेशानी सुननी है,

70-इश्क की पीढा बहुत ही
असहनीय होती है
साहब!
इसमें कोई दवा भी काम
नहीं आती है,

71-मोहब्बत क्या है
     प्यार क्या है
बुरा तो तब लगता है
जब कोई इश्कजादा ही
पूछे ये इश्क क्या है?

72-इश्क करना या बङा
जुर्म करना
दोनों एकसमान ही है
साहब!
दोनों में साधारण बेल नहीं मिलती,

73-इश्क की दफा बहुत बङी
होती है साहब!
इश्क के केश में उसकी आँखों में
कैद हूँ
बेल डाली थी फिर भी बेल(जमानत)
नहीं दी उसने,

74-आज मैंने इश्क के उसके सारे
खत जला दिए
हाँ अब उसका दिल से नाम तक भी
हम भुला दिए,

75-इश्क मरहम और जखहम दोनों लगता है
बफाई में मरहम और बेवफाई में जखहम
लगता है,

76-अरे नादाँ दिल तू मेरी मोहब्बत से
वाकिफ नहीं
मैं शांत जल हूँ कोई तूफाँ नहीं,

77-लाखों पहरे इश्क नाकाम कर
             देता है
जिसे इश्क से इश्क हो
        वो दुनियाँ में नाम कर देता है,

78-इश्क क्वाँरा सा लगता है
       मगर वो क्वाँरा नहीं
हुए हैं लाखों निकाह
        पर एक भी पूरा नहीं,

79-उसने कहा था कुछ भी हो मेरी
मोहब्बत को दिल में सलामत रखना
मैं ये भी न कर सका इतना
           बेवफा निकला !,

80-नजरें झुका करके आँखों में
आँशुओं को सुखा लेता हूँ
दोष उसका नहीं मैं खुद को
भी सता लेता हूँ,

81-इश्क है उसे तो इश्क से
इश्क की सिफारिश क्या
ये जो मजहबी हैं
  वो इश्क करना जानें ही क्या,

82-हकीकत ये है इश्क
जुमलों में नहीं पलता
इसमें वादे निभाने पङते हैं
सिर्फ वादों से काम नहीं चलता,

83-इश्क भीङ भरी आवादी
का शहर है
और हाँ गाँवों में
तो मोहब्बत भी शहर है,

84-साहब!
हम वो देहाती हैं इश्क जो
करते हैं तो आर-पार तक की
लङाई लङते हैं
नहीं तो इश्क का नाम
सपने में भी न लेते हैं,

85-मोहब्बत से सींचा हुआ बगीचा
गम ने पल भर में उजाङ दिया
उसे क्या पता ये सब
         मेरे दिल ने ही है किया,

86-ओ इश्क तेरे अहसान अपनी
जिंदगी के नाम करते हैं
अब कभी तेरी जरूरत न पङे
इसलिए तेरे खिलाफ बयान करते हैं,

87-आज अतीत में लौटा तो पाया
कि वो मेरे खिलाफ न थी
मैं था इश्क से अनजान
वो (अब नहींहै) मेरे लिए ही जीती थी,

88-इश्क की समय सीमा किसी
ने समझ न पाई
मोहब्बत की कोई ने
    कर ही न पाई भरपाई,

89-दिल का खेल लोग अब
दिल से नहीं प्लास्टिक के
खिलौनों की भाँति खेलने लगे हैं
एक टूटा नहीं दूसरा खरीद कर
लाने लगे हैं,

90-ये इश्क है इसका सफर
ऐसे तय न कर पाओगे
जब तक खुद को प्रेम की
ज्वाला में न जलाओगे,

~ शिवम यादव "अन्तापुरिया"
शायर... के कुछ लेख......& next...

2..."इश्क है उसे"

46-खाँमखाँ प्यार में
        इश्क की आङ में
धोखा देने में वो  
  तुमको कामयाब हो गया,

47-इश्क पर इश्क में ऐसे ही नहीं मैनें लिखा है
इश्क में हजारों दफा मुझे धोखा भी मिला है,

48- वो समझता मैं उसके इश्क का
प्यासा अब भी हूँ
साहब!
हम तो भूल भी गए हैं
उससे कब इश्क किया था मैंने,

49- इश्क में न जाने कितने
आशियानें खाक हो गए
हजारों नजरें छुपाकर
  वो हमारे हो गए,

50-हँसकर उसका मेरे पास आना
नंगे पाँव दौङकर आना
इससे साबित होता
वो मेरी दीवानी है,

51-ये इश्क है क्या
जो कभी तन्हाँ क्यों नहीं
रहता है
फिर ये दो लोगों को बिछङ
क्यों जाने देता है,

52-इश्क में रात छोटी भी बङी
लगती है
जब बङी होती है
तब तो तन्हाइयाँ ही तन्हाइयाँ
होतीं हैं,

53-जब दिल से इश्क का खेल
हर कोई खेल लेता है
फिर ये राष्ट्रीय खेल घोषित
क्यों नहीं होता है,

54-चलो इश्क पर गम का
पहरा लगा दें या
गम पर ही इश्क का
पहरा लगा दें,

55-मेरा इश्क से यूँ ही नाता
नहीं हो गया है
वर्षों तङपा हूँ
तब जाकर वो मेरा हुआ है,

56-इश्क की दुनियाँ रंगीन
सी लगती है
इश्क मिलकर खो जाए
तो जिंदगी गमगीन
सी लगती है,

57-खासकर जब अपना
दोस्त ही धोखा देता है
ज्यादातर इश्क में भी
ऐसा ही होता है,

58-हाँ तारीफ करता हूँ
उसकी जो मेरे बिन न रहती थी
न जाने क्या हो गया उसको
अब मुझे दुश्मन समझती है,

59-वो इश्क की गली से
मैं गुजरा ही कब था
फिर भी मुझे उसने
इतने प्यार से देखा क्यों था,

60-वो दरम्याँ गुजर गए
इश्क से बेकरार होकर
हम भी बिगङ से गए
प्रेम में मशगूल होकर,

61-हर वक्त मोहब्बत का
घूँट पीकर जिंदा हूँ
मगर ऐसे इश्क में जिंदा
भी मुर्दा हूँ,

62-इश्क में हजारों यादें
दफन सी हो गईं
      वो जी तो रहा है
मगर उम्मीदें तो
     कफन सी हो गईं,

63-मुझे कुछ शायर भी
कायर से नजर आने लगे हैं
क्योंकि अब इश्क से धोखे
भी हाथ मिलाने लगे हैं,

64-वो इतना इश्क क्यों
          कर बैठा था मुझे
अब प्यार में इश्क के
पत्थर क्यों मारने लगा मुझे,

65-अपनाए इश्क जिसको
जिंदगी वो सफल हो गई
न मिले इश्क उसकी सूनी
राहें हो गईं,

66-इश्क के रोग का सिला
भारी बीमारी है
जिसे हुआ नहीं उसका
संघर्ष जारी है,

67-तूफानों को दरकिनार
करते जाएँगे
मोहब्बत में उनके पथ
हम बनते जाएँगे,

68-ओ जिंदगी अब इतना
परेशाँ न कर
मैं हार, थककर बैठने
वाला भी नहीं,

69-हर मंजिल में इश्क
की भरपाई करनी है
जो मुझसे नाराज है
उनकी परेशानी सुननी है,

70-इश्क की पीढा बहुत ही
असहनीय होती है
साहब!
इसमें कोई दवा भी काम
नहीं आती है,

71-मोहब्बत क्या है
     प्यार क्या है
बुरा तो तब लगता है
जब कोई इश्कजादा ही
पूछे ये इश्क क्या है?

72-इश्क करना या बङा
जुर्म करना
दोनों एकसमान ही है
साहब!
दोनों में साधारण बेल नहीं मिलती,

73-इश्क की दफा बहुत बङी
होती है साहब!
इश्क के केश में उसकी आँखों में
कैद हूँ
बेल डाली थी फिर भी बेल(जमानत)
नहीं दी उसने,

74-आज मैंने इश्क के उसके सारे
खत जला दिए
हाँ अब उसका दिल से नाम तक भी
हम भुला दिए,

75-इश्क मरहम और जखहम दोनों लगता है
बफाई में मरहम और बेवफाई में जखहम
लगता है,

76-अरे नादाँ दिल तू मेरी मोहब्बत से
वाकिफ नहीं
मैं शांत जल हूँ कोई तूफाँ नहीं,

77-लाखों पहरे इश्क नाकाम कर
             देता है
जिसे इश्क से इश्क हो
        वो दुनियाँ में नाम कर देता है,

78-इश्क क्वाँरा सा लगता है
       मगर वो क्वाँरा नहीं
हुए हैं लाखों निकाह
        पर एक भी पूरा नहीं,

79-उसने कहा था कुछ भी हो मेरी
मोहब्बत को दिल में सलामत रखना
मैं ये भी न कर सका इतना
           बेवफा निकला !,

80-नजरें झुका करके आँखों में
आँशुओं को सुखा लेता हूँ
दोष उसका नहीं मैं खुद को
भी सता लेता हूँ,

81-इश्क है उसे तो इश्क से
इश्क की सिफारिश क्या
ये जो मजहबी हैं
  वो इश्क करना जानें ही क्या,

82-हकीकत ये है इश्क
जुमलों में नहीं पलता
इसमें वादे निभाने पङते हैं
सिर्फ वादों से काम नहीं चलता,

83-इश्क भीङ भरी आवादी
का शहर है
और हाँ गाँवों में
तो मोहब्बत भी शहर है,

84-साहब!
हम वो देहाती हैं इश्क जो
करते हैं तो आर-पार तक की
लङाई लङते हैं
नहीं तो इश्क का नाम
सपने में भी न लेते हैं,

85-मोहब्बत से सींचा हुआ बगीचा
गम ने पल भर में उजाङ दिया
उसे क्या पता ये सब
         मेरे दिल ने ही है किया,

86-ओ इश्क तेरे अहसान अपनी
जिंदगी के नाम करते हैं
अब कभी तेरी जरूरत न पङे
इसलिए तेरे खिलाफ बयान करते हैं,

87-आज अतीत में लौटा तो पाया
कि वो मेरे खिलाफ न थी
मैं था इश्क से अनजान
वो (अब नहींहै) मेरे लिए ही जीती थी,

88-इश्क की समय सीमा किसी
ने समझ न पाई
मोहब्बत की कोई ने
    कर ही न पाई भरपाई,

89-दिल का खेल लोग अब
दिल से नहीं प्लास्टिक के
खिलौनों की भाँति खेलने लगे हैं
एक टूटा नहीं दूसरा खरीद कर
लाने लगे हैं,

90-ये इश्क है इसका सफर
ऐसे तय न कर पाओगे
जब तक खुद को प्रेम की
ज्वाला में न जलाओगे,

~ शिवम यादव "अन्तापुरिया"
शायर... के कुछ लेख......& next...

Wednesday, December 5, 2018

1 " इश्क है उसे "

   *प्रस्तावना*
        .......

      *समर्पण*
         .........

1-इश्क है उसे इश्क की
तामील होनी चाहिए
शिवम जो हैं इश्क के रोगी
उनकी खोज भी होनी चाहिए,

2-जितने ज्यादा इश्क में हम
खामोश दिखते हैं
उससे कई गुना ज्यादा हम
इश्क पर रोज लिखते हैं,

3- क्या बताऊँ इश्क है उसे
चाहता हूँ थोङा इश्क हिस्से
में मेरे भी पङे,

4-हो गया हाँ कारगर तेरा
इश्क तो रँग लाया है
मैं लाचार था इजहार
करता कैसे अब
तो इजहार करने
तू खुद ही आया है,

5-मैं भूल गया था
तेरे इश्क को
तुझे वो पल आज भी याद हैं,
करूँ क्या मैं मजबूर था
इस जिंदगी के रास्ते
बेमिजाज हैं,

6-ये इश्क का शहर मेरे दिल से
     गायब सा हो गया है
जब ढूँढकर पहुँचता हूँ
पास तो भाला लिए खङा है,

7-इश्क में उसने मुझसे
हजारों इजहार किए
एक मैं था कि एक भी
स्वीकार न कर पाए,

8-हस्र है तेरा इश्क में डूबकर आना
      मुझे न पता था तेरा ये अफसाना
जिंदगी कहती करती क्या है "मतलब नहीं"
     मुझे तो बस चलते ही चले जाना,

9-इश्क में उसके घर के
दीवारों में दरारें उसके माफिक थीं
क्योंकि रोज वो उन दरारों से
  मुझे ही देखा करती थी,

10- ये इश्क भी दिल में
     भूचाल सा लाता है
      तब बिन देखे उसे
  मुझसे जिया नहीं जाता है,

11-ऐ खुदा उन गद्दार दिलों में
इश्क के बीज मत बोना
जिनके फितरत में हो
बिन फल आए फसलों को
उजाङ देना,

12-इश्क मजहब न जाति देखता है
सिर्फ सामने वाले में इश्क होना चाहिए
ये इश्क सिर्फ इश्क देखता है,

13- इश्क क्या है..?
    हवा है , पानी है,
जिंदगानी है या निशानी है
हो जाता है जिसको
उसकी बनती कहानी है,

14-ये इश्क जिसके पास आता है
तब तो पता नहीं चलता
साहब!
            जिसदिन जाता है
उस दिन कई आशियाने उजाङ जाता है,

15-तू क्यों मेरी इश्क में फजीहत करता है
         जब मेरा दिल
तेरे नाम अपनी शराफत बसीहत करता है,

16-चल रहा हूँ जिंदगी में
अकेले रहने का शौक लेकर
शुक्र है इश्क न हुआ मुझे
       किसी को देखकर,

17-रहनुमा जिंदगी तन्हाइयों में गुजारा लूँगा
ऐ खुदा तू मुँह न मोङ लेना
           तेरे बिना न रह पाऊँगा मैं

18-इश्क इशारे भी करता है
इश्क हँसाता भी है, रूलाता भी है
दूर होकर तुमसे, फिर तङपाता भी है,

19-इश्क के अपराध में सजा गम है
इश्क में रोना क्या है, हँसना क्या है
इश्क में जितना जियो उतना ही कम है,

20-मैं इश्क में तेरे काबिल नहीं
लगूँ गले ये मेरी फितरत नहीं
     हूँ अनजान इश्क से
करूँ क्या तुमसे बातें कई,

21-पल दो पल मेरे साथ
           गुजार कर जाना
मैं हूँ तन्हाँ इस समय
थोङा सब्र मुझे देते जाना,

22- तेरी इश्की इजहारी सुबह
की याद आज भी है
तूने बुलाया मैं मिलने न पहुँचा
उसका मलाल आज भी है,

23- चलो आज इश्क को सरेआम
करता हूँ
तू जा अकेला चला जा
मैं उससे एक मोहब्बत का सवाल
करता हूँ,

24-हो गया हूँ बेकरार
इश्क में अब सिर झुकता नहीं
काबिले है इश्क है उसका
जिसे भूल सकता नहीं,

25-रख लो अदब से एक
और नाम मेरा
'बेवफा' कहकर
मैं चलता ही जाऊँगा
इश्क की राहों पर
खबर से बेखबर होकर,

26-इश्क में क्या गुनाह
क्या फरेब है
जब इश्क हो जाता है
तो सोचता कौन है,

27-मुझे देखकर ये न सोचना
कि मैंने भी इश्क किया होगा
ऐसा नहीं है
इश्क में डुबकी जरूर लगाई है
भूलकर भी नहाया न होगा,

28-इश्क में नहाकर गम की
छाॅव में बैठा हूँ
भूलकर उसको आज याद सी
कर बैठा हूँ,

29-ये इश्क का सफर आसाँ नहीं
इस सफर को क्यों चुनते हैं लोग
देखता हूँ कहाँ तक सँभलकर
चलते जाएँगे लोग,

30-इश्क कभी चंदा तो कभी सूरज
बनकर आता है
कभी रूलाता तो कभी सर्दी में धूप
बनकर हँसाता है,

31-इंतजार इश्क का बहुत ही
मार्मिक है
कोई रोककर दिल बहलाता है
कोई अतीत में चला जाता है,

32-कोई मिलकरके रोता है
कोई मिलने को रोता है
ये प्रेम का विरह है
प्रेमी की धङकन को तो
बस प्रेमी समझता है,

33-चंदा और सूरज सफर तय
करके दुबारा फिर से
आ जात हैं
विरह में इश्क के वो
बिना उसके तङपकर
रह जाते हैं,

34-हाल बेहाल क्यों है इश्क
में उसका
मैं जा रहा हूँ दुनियाँ छोङकर
बस हूँ मेहमान पल दो पल का,

35-इश्क में अभी जीता कहाँ
ये तो अभ्यास मैच था
फिर मिलूंगा अगले जनम में
तब वाकई सीरीज जीतूँगा,

36-अभी तो इश्क के बीज
      बोए है उसने
कब उगेंगे और फल देंगे
    ये जाना किसने,

37-इश्क न गरीब होता है
      न अमीर होता है
     इसे निभा जो पाता है
  वही उसकी जागीर होता है,

38-इश्क शब्द समाज में
हमेशा कटु बनता आया है
इसे जाना उसी ने है
जिसने खुद को इश्क की ज्वाला
में आहुति देकर देखा है,

39-इश्क में कोई भी रीति-रिवाज
का बंधन नहीं शायद
तभी तो हर शख्स की आँखों
में लगता है जायज,

40-इश्क बदनाम भी है
        इश्क गुमनाम भी है
इश्क कामयाब भी है
    इश्क में कुछ के
        हाल बेहाल भी हैं,

41-इश्क से बचा कौन है
     इश्क से रँजा कौन है
   बेदाग हो तुम जो इश्क में
   तो फिर बदनाम हुआ कौन है,

42-इश्क के माफिक उनकी
निगाहें होने लगीं
जरा सी देरी में अब मुझे
  भी बेचैनी होनी लगी,

43-इश्क की बारात लिए
हजारों गम भी आएँगे,
तुम हुए नाकाम तो क्या हुआ
वो तो कामयाब हो जाएँगे,

44-इश्क की तन्हाइयों में
बात चाँद से भी कर लेते हैं
जब अकेले जी नहीं भरता
तो चंदा को ही आशिक मान लेते हैं,

45-तेरे इश्क के बसीहत नामा
        का गवाह कौन है
तुझे सच्चा प़्रेम हुआ है
           ये मानता कौन है,
.........................................
~शिवम यादव "अन्तापुरिया"
शायरनामा के कुछ अंश....

Monday, December 3, 2018

"समाप्त हो रही मर्यादा"

गौरक्षा गौरक्षा का डंका पीटने वालों जरा इस ओर भी ध्यान दो,
बुलंदशहर जैसी घटना कोई अन्य स्थनों पर भी जन्म न ले ले इससे पहले इस पर अंकुश लगा लें,
कोई भी इतिहास को उठाकर देख लो राजा- महाराजाओं के पन्नों को खोलकर पढ लो
राजा विराट हो या राजा नल या श्रीकृष्ण का उदाहरण ले लो,
सभी के पास गायों के गौशाला थे
अब आज का इतिहास देखो
बात प्रदेश की हो या देश की
जो सत्ता में है वो ही प्रजा का राजा होता है
गौरक्षा का भाषण देने से पहले अपने आप में उस नेता या मंत्री को सोचना चाहिए कि खुद ने कितनी गायों को पाल रखा है या आवारा गायों का कोई अच्छा प्रबंध किया है जिससे न गाय को और न ही किसान कोई समस्या हो,
जबाव दो  ! योगी जी, मोदी जी, मोहनभागवत
और आरएसएस वाले सिर्फ दिखावटी हाफ चड्डा पहने हुए हिन्दू धर्म की लत्तालतीफी ही करने में लगे हैं
गाय हमारी माता है, सब जानते है लेकिन जब आधुनिक युग में हर माँ को माँ होने का अधिकार व सम्मान नहीं मिल पा रहा है अपने पुत्रों द्वारा, तो गाय को कैसे मिल पाएगा
गाय गाय गाय पर तो सब डीगें मारते है कभी बछङों की तरफ भी ध्यान है कि नहीं
जब से योगी ने भैंसों की कटान पर रोक लगाई तब से बहुत परेशानी का सबब किसान झेल रहे हैं
मुझे जबाव दो राजा भी तो शिकार खेलने जाते थे तो क्या वो हत्या नहीं होती थी,
जबाव दो
अगर इतने ही दयालु हैं आप तो ये बताओ जो आपके गले में रैलियों में फूलों का माला डाला जाता है वो फूल भी तो सजीव होते हैं
अगर फूल के जीवों की जान को नजरअंदाज कर देते हो तो वैसे हर व्यक्ति की सोच अलग है अपने अपने दृष्टिकोण से काम करता है और मैं गायों और भैसों के कटान के पक्ष में तो नहीं कह रहा हूँ, लेकिन पुराने समय में देखो सारे राज्य के आवारा पशुओं का सटीक प्रबंध होता था और राजा का गौशाला भी, आखिर योगी आप तो पूरे यूपी के राजा ही हैं सारे आवारा पशुओं को अपना गौशाला बनवाकर उसमें रखो ,नहीं तो हर तहसील में मवेशी खाना खुलवा दो जिससे आवारा पशु उसमें रखे जा सके,
एक नजर यहाँ करें...
पहले पुलिस को देखकर लोग डरते थे आज नहीं डरते सीधे उलझ जाते हैं जान लेने और देने पर तुल गए हैं आखिर जो पुलिस अधिकारी मर रहें है उनके भी बच्चे पत्नी हैं आप रूपये ही दे पाएँगे न कि किसी का उजङा सुहाग आपके पैसों से खिल पाएगा, इसलिए बता रहा हूँ मर्यादा खतम हो रही जनता किसी से डरती नहीं क्योंकि अपना खून पसीने की कमाई खाती है,और चुनावीआपदओं से हैरान होकर ही वो ऐसा कदम उठाती है,
नेता जब मंच पर होता है तो लगता है इसके अंदर जनता के हित का टैरिफ डला है,
मंच से उतरते ही उसकी वैधता खतम सी हो जाती है,
जनाब जनता इसलिए गुस्से में नजर आती है,
आपने तो कह दिया कटान बंद,
ये बताओ
किसान पशुओं को लाभ के लिए ही रखता है जहाँ उसे लाभ न होगा तो वो उसको फालतू में बाँधकर क्यों चारा खिलाएगा,
बछङा बिचेगा नहीं तो वो रखेगा क्यों
आज आप जरा किसानों के खेतों का दौरा करके जरा देखें खेतों की हालात खस्ताहाल सी हो गई है???..
मेरी तो आँखें नम हो जाती हैं जब मैं उन आवारा मासूम से बछङे व छोटी सी बछिया को कङाके की सर्दी में ठिठुरता देखता हूँ तो कहीं उनके पैर टूटे और गर्मियों में प्यास से भी मरते देखा है क्योंकि उनको पानी कहाँ से मिले जब मैं इतना बङा 20साल को हो गया कभी यहाँ के नहर वबम्मा में लगातार 15 दिन भी पानी नहीं देखा है और यहाँ तक मैंने कई गाय, बछङों को अपने आँखों के सामने ब्लेड वाले तारों से कटती व कराह भरते हुई मरते देखा है
अब मेरे सहन के बाहर तब ये आज लिख रहा हूँ गुस्सा उनपर भी आता है जिन्होंने इन्हें छोङा है लेकिन
"मजबूरी व्यक्ति को मजबूर कर देती है"
ये मेरा मानना है
किसान छोङे न तो करे क्या चारा की भी तबाही चल रहीहै, और कोई इन्हें खरीदता भी नहीं है
आवारा पशुओं के बोल....

    हम तो आवारा थे
आवारा ही हो गए,
पहले भूख मिटाने को जंगल थे
अब वो भी छिन गए,
प्यास मिटती नहीं,
भूख थमती नहीं,
और पास कुछ भी नहीं,
है तो एक छोटी सी  'जान'
जो तङप-तङप कर भी
निकलती नहीं!!
  लेख:-
युवा लेखक/कवि/विचारक/चिंतक
शिवम यादव "अन्तापुरिया"