I am a Poet & Writer . मैं काव्य-संग्रह और मुक़्तक लिखता हूँ I मुझे लिखने में मज़ा आता है , धन्यबाद I
Monday, May 25, 2020
Monday, May 11, 2020
"माँ की ममता"
हर पल तुम्हारी मुझे याद आए
यहाँ से बिछडकर बहुत दूर जाए
बड़े ही शलीके से पाला था उसने
मेरी माँ तेरी याद हर पल रूलाए
शिवम अन्तापुरिया
नफ़रतें सदा कुछ
नफ़रतें सदा कुछ नेगैटिव ही लाती हैं !!
प्यार में यादें भी पॉजिटिव आती हैं !!
~ @OshayarShivam
दुनियाँ में अब कुछ भी दिखता नहीं है !
बहुत थक गए हैं मन ये रुकता नहीं है !!
शिवम अन्तापुरिया
दुनियाँ के वादों से यूँ घिर गया हूँ...
उसे भूल जाऊँ तो बिछड़ भी गया हूँ...
शिवम अन्तापुरिया
पिछली यादों में अब भी बहुत कुछ है
जिंदगी जिंदगी के बिना नाकुछ है
शिवम अन्तापुरिया
क्या करेंगे मोहब्बत का अब यार हम
जब मोहब्बत के अब पास रहते हैं हम
शिवम अन्तापुरिया
ये इरादे तो अक्सर इरादे ही हैं
जो गिरा दें वही लोग आधे भी हैं
शिवम अन्तापुरिया
कोई अहसास है दिल में उसे ऊपर तो लाओ तुम
मोहब्बत की सज़ाओं का जखम अब बन न जाओ तुम
ज़मानें में मोहब्बत की हज़ारों की बला हो तुम
चाहत है तो रूक जाओ नहीं तो भूल जाओ तुम
शिवम अन्तापुरिया
जिस व्यक्ति को उसके मुताबिक मंजिल पर न चलने दिया जाए !
उसकी दशा भटकते पथिक की भाँति हो जाती है!!
शिवम अन्तापुरिया
सरहदे खून मांगती हैं
मुझे उन्हें अब फ़ूल देने होंगे
जहाँ जिहादी भरती हो हुंकार
वहाँ अब मोहब्बत के
बीज बोने होंगे
- शिवम अन्तापुरिया -
हम तो अपनों को अधिकार देने लगे
लोग पागल सा हमको समझने लगे
ढू्ँढते-ढूँढते वो तो खुद खो गए
प्यार के हर सफ़र में हम चलने लगे
शिवम अन्तापुरिया
शराब पीने से बेहतर है कि
अपने गम और गुस्सा को पी जाओ
शिवम अन्तापुरिया
इरादे यही हैं
"इरादे यही हैं"
दुनियाँ के अक्सर इरादे यही हैं
मेरे साथ रहने के वादे यही हैं
कितने जमाने भी बीते हैं गुज़रे
मगर याद में तेरी अब भी दबे हैं
सियासत के पन्ने पढ़ूँ और कैसे
तुमसे मिले दिन बहुत हो गए हैं
चाहत भरी महफ़िलों में यूँ जाके
तेरा नाम सबको वो बताते चले हैं
दरियादिली क्या चाहत शिवम है
पग-पग पे यादें सताती सनम हैं
अक्सर तेरे बिन सदा रह न पाऊँ
ये इरादे तेरे यार मुझसे अधिक हैं
~ शिवम अन्तापुरिया
उत्तर प्रदेश
कोरोना से लड़ाई
"कोरोना से लड़ाई"
जब से आया कोरोना
ये सबका रोना रोना है ...
मातृभूमि की माटी में
हँसते-हँसते सोना है
देशप्रेम और देश सुरक्षा
में खुद को खो देना है
देश हमारा सर्वोपरि है
हम भारत के बेटा हैं
जब से आया कोरोना
ये सबका रोना रोना है ...
जमीं हमारी अम्बर मेरा
सबका एक ही कहना है
घर में सदा रहेंगे सुरक्षित
एकजुट हमको होना है
हर थककर ये भाग जाएगा
बस कुछ दिन का कोरोना है
जब से आया कोरोना
ये सबका रोना रोना है ...
धरती के भगवान जो हैं
उनको नमन भी करना है
जो हैं लीन काट में इसके
उनका मान भी रखना है
भारत के चिकित्सकों का
साथ हम सबको भी देना है
जब से आया कोरोना
ये सबका रोना रोना है ...
कवि/लेखक
शिवम अन्तापुरिया कानपुर
उत्तर प्रदेश
Friday, April 17, 2020
चाहता है वो
"चाहता है वो"
तुम्हारे प्यार की रश्में
निभाना चाहता है वो
राह कितनी कठिन भी
हो आना चाहता है वो
तुम्हारे प्यार में घुलकर
मिश्री बनना चाहता है वो
नजर नजरें मिलाकरके
दुआएँ माँगता है वो
तेरी चाहत की नगरी
में घूमना चाहता है वो
हमेशा साथ रहना तुम
हिफ़ाजत चाहता है वो
तुम्हारी हर कहानी में
मोड़ लाना चाहता है वो
रचयिता
~ शिवम अन्तापुरिया
उत्तर प्रदेश
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