Wednesday, November 6, 2019

संवेदना का अकाल

विषय -संवेदना का अकाल 

वो हर ओर नज़र आते हैं 
संवेदना व्यक्त करते जाते हैं 

संवेदनाएँ कम पड़ती जाती हैं 
इतने संवेदना के अवसर आते हैं 

सड़क,चौराहे,गलियारे पर भी  
संवेदनाओ के अम्बार नज़र आते हैं 

कैसी दुर्दशा हो रही देश की 
इसके अन्ज़ाम नज़र आते हैं 

    रचयिता 
शिवम अन्तापुरिया 
    उत्तर प्रदेश

प्यार की भूमि वर्षों से सूखी पड़ी..

प्यार की भूमि वर्षों से सूखी पड़ी...
फसलें उगती नहीं भूमि बंजर पड़ी...
प्यार में थी तेरे उऱर्वरा की कमी...
फिर क्यों कहते हो खेती से उन्नत नहीं 


पल भर ही मैं लिखता हूँ...
कुछ ऐसी मेरी 
कहानी है...
आँख उठाकर देखो तुम...
तो दर्द से सजी कहानी है... 

शिवम अन्तापुरिया

अधूरा इश्क है तेरा 
हमारा नाम लो चाहें
मैं तुझसे हार करके भी 
तुझको हार पहनाऊँ

कोई चाहत में मुझको 
खोजकरके 
गुम हो जाता है 
मैं हूँ प्रेम का तिनका 
प्रेम में बहता जाता हूँ..


इश्क के हिस्से में उनके हिस्से बनें 
आजकल प्यार के मेरे किस्से बनें 
छोड़कर मुझको कैसे जाओगे सनम
प्यार के हम तुम्हारे सितारे बनें



लोग अक्सर वहाँ,पर छोड़ देते हैं।
सारे रास्ते जहाँ,से खतम होते हैं।।
मन्ज़िल अपनी चलने कोई और नहीं आयेगा 
इस दुनियां में गिराने वाले बहुत हैं
उठाने कोई नहीं आयेगा 


प्यार की भूमि वर्षों से सूखी पड़ी...
फसलें उगती नहीं भूमि बंजर पड़ी...
प्यार में थी तेरे उऱर्वरा की कमी...
फिर क्यों कहते हो खेती से उन्नत नहीं 

शिवम अन्तापुरिया

खिल गए

"खिल गए"

कुछ पल बीते 
कुछ लब बीते 
बीत गई अब 
वो सारी जीतें

बीती रात आज 
  फ़िर वो थी 
    खिल गए वो 
जैसे कमल दल थे 

उनके भी चेहरे 
आ खिल गए 
जिनके माथे पर 
बनी सिलवटें थी 

खुशहाल माहौल 
   था जब घर में 
तब उसने दस्तक दी 
स्वागत के खातिर 
उसके न्योछावर सारे 
    कमल दल थे 

     रचयिता 
शिवम अन्तापुरिया 
   उत्तर प्रदेश

Saturday, November 2, 2019

उनकी पहचान थे

"उनकी पहचान थे"

साथ के सफ़र में हम 
 उनसे अनजान थे 
प्यार की राह में हम 
उनकी पहचान थे 

चलते चलते वो 
   चलते गए 
हम यादों में उनकी 
   बसते गए 

साथ जीने-मरने 
की उम्मीद लेकर 
साथ उनके कदम 
हम भी रखते गए 

शिवम अन्तापुरिया 
    उत्तर प्रदेश

Thursday, October 31, 2019

नज्म

नज़्म 
"हम तो आज़ाद हैं"
  
हम तो आज़ाद हैं हम तो आज़ाद हैंं -2

बंदिशों से सदा उनकी लाचार हैं 
उनको लगता सदा हम तो बेकार हैं 
छोड़ दी हमने अब तलवार है
बन गई अब कलम मेरी पतवार है

हम तो आज़ाद हैं हम तो आज़ाद हैं -2

लिखते लिखते नहीं हाथ थकते मेरे 
देश पर मेरा लिखने का अधिकार है 

हम तो आज़ाद हैं हम तो आज़ाद हैं -2

देखकर लोग कहते हैं आवारा है 
 ये तो आवारा है -3, ये तो क्वाँरा है 
धड़कने उनके दिल की हैं बढ़ने लगीं 
फिर से कहने लगे वो तो बेचारा है
वो तो बेचारा है वो तो बेचारा है 

हम तो आज़ाद हैं हम तो आज़ाद हैं -2

नज़्म 
"हम तो आज़ाद हैं"
  
हम तो आज़ाद हैं हम तो आज़ाद हैंं -2

बंदिशों से सदा उनकी लाचार हैं 
उनको लगता सदा हम तो बेकार हैं 
छोड़ दी हमने जबसे तलवार है
बन गई अब कलम मेरी पतवार है

हम तो आज़ाद हैं हम तो आज़ाद हैं -2

लिखते लिखते नहीं हाथ थकते मेरे,
देश के मेरे हालत भी बर्बाद है,
मुझको लिखने का पूरा अधिकार है 

हम तो आज़ाद हैं हम तो आज़ाद हैं -2

देखकर लोग कहते हैं हमारा हमें
कई लोगों की नफरत ने मारा हमें,
हम बने हैं अभी तक जो सिरताज हैं,
हम तो आजाद हैं–2

उनको लगता अभी भी हम आवारा है 
 ये तो आवारा है -3, ये तो क्वाँरा है 
धड़कने उनके दिल की हैं बढ़ने लगीं 
फिर से कहने लगे वो तो बेचारा है
वो तो बेचारा है वो तो बेचारा है 

हम तो आज़ाद हैं हम तो आज़ाद हैं -2


~ शायर शिवम अन्तापुरिया


~ शायर शिवम अन्तापुरिया

कलम की पतवार हो

अपनी जिन्दगी में कलम को पतवार बनाओ या अब
हाथों में तलवार उठाओ 
फ़ैसला समझ कर ही करें 


अब दुनियाँ को सुधारने के लिए हाथों में तलवार नहीं 
हाथों में कलम की पतवार होनी चाहिए

शिवम अन्तापुरिया 

दिल के करीब

"दिल के करीब"

कुछ रिश्ते बहुत

 अजीब होते हैं 

जो दिल के बहुत ही 

करीब होते हैं 

कभी उनसे दूर 

नहीं रहा जा सकता 

साथ रहने वाले 

खुशनसीब होते हैं 



जिंदगी हमसफ़र बनकर 

यूँ ही निकल पड़ती है 

कोई साथ दे या न दे 

वो अकेले ही अपने 

लक्ष्य को भेद सकती है 



न सफर तय था 

न मंजिल पता थी

वो रिश्तों की डोरी 

    से बँधा था 

न इसकी खबर थी 



  रचयिता 

शिवम अन्तापुरिया 

     उत्तर प्रदेश