I am a Poet & Writer . मैं काव्य-संग्रह और मुक़्तक लिखता हूँ I मुझे लिखने में मज़ा आता है , धन्यबाद I
Monday, December 24, 2018
Thursday, December 13, 2018
राजनीतिक दखल से बढ़ती मुश्किलें
आजकल देश की जनता और धर्म के रक्षक कैसे हैं?
जैसे हलवाई की दुकान पर कुतिया पहरेदार हो और दादुरों की सभा का सेनापति सर्प हो .....
सोचो कैसे सब संभलेगा मेरे ख्याल से तो कभी नहीं,
यहाँ हो रहा राजनीति का दखल...
अब तो न्यायालय ही माँग रहा है न्याय
जनता को कैसे मिलेगा न्याय
सभी अदालतें लगती हैं राजनीति के अधीन
मानों अदालत बन बैठी हैं राजनीति की रखैल
अब सुनो सीबीआई अफसरों के हाल
राजनेता जिनके हाथों में
धर्म की बागडोर दे बैठे हैं
वही अस्थाना और वर्मा
रिश्वत का माला पहन
एक-दूसरे की खींचा तानी
कर बैठें हैं,
जिनके हाथ में धर्म के तराजू दिखते हैं
वही घटतौली को धर्म बनाए बैठे हैं,
एक दूसरे पर दोनों आरोप प्रत्यारोप लगाते हैं,दोनों के मंसूबे क्या जो समझ मेरे नहीं आते हैं,
बढ रहा है अधर्म
क्योंकि धर्म की आङ में अधर्म हो रहाहै इसलिए इसकी जङे मजबूत होती जा रहीहै
अधर्मी को रोका नहीं बल्कि बढ़ावा दिया जा रहाहै,
अधर्म क्या है ?
जहाँ जनता की दर्द भरी आवाज, कराह! को दबाया जा रहा हो और एक खुशहाल नेता की जुमलेबाकी को अखबारों की पहली खबर का नाम दिया जा रहा हो,
और हाँ गिरते हुए को उठाया नहीं बल्कि नजरअंदाज किया जाता हो,
फिसलते हुए को संभाला नहीं और एक धक्का जरूर दिया जा रहा हो,
सच्चाई को झूठ के वजन के नीचे दबाया जा रहा हो, झूठ को सत्य साबित किया जा रहा हो यही अधर्म के लक्षण हैं ये सब कहाँ हो रहाहै आप समझ रहे हैं,
दुष्कर्मों पर बस इतना ही कहूँगा..?
शिवम शायद उस दिन संविधान की हथकङियों का ताला खोला जाएगा,
जिस दिन किसी राजनेताओं या उद्योगपति की
लङकियों का जिस्म निचोङा जाएगा,
जवानों की रक्षा का पुख्ता इंतजाम का हवाला देकर आपका भारी भाषण सोभा नहीं देता नेता जी,
क्योंकि
अगर आपको इतनी ही फिक्र होती तो सीमा पर जवान शहीद नहीं होते
उनके परिवार ऐसे नहीं बिखरते
सबसे ज्यादा जवान 2014-18 के बीच शहीद हुए हैं आखिर क्या इंतजाम हुआ है,
आंकङे बताते हैं विदेशों में भी, चार साल में खाङी में 28523 भारतीय की मौत पर क्या जबाव है आपका जिसमें साऊदी में ही 12828 की मौत हुई है क्या कोई असर भी पङा है विदेशों में आपके दौरों का भारतीयों की मौतें जरूर बढ़ी हैं,
एक नजर इस पर डालें
हर नेता की रैली कङी सुरक्षा से लैस सीसीटीवी कैमरे भी निगरानी करते हैं
तो क्या जिनके कंधों पर देश की रक्षा का बोझ रखा है उनकी सुरक्षा के लिए आप सभी भारतीय सीमाओं पर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगवा सकते, शायद कैमरे इसलिए नहीं लगाए जा रहे क्योंकि इससे नेताओं का हीरोइन, ड्रग्स, सोने जैसे अवैध व्यापार रूक जाएँगे न तो क्यों सीना कूटते हो कि मुझे दुःख होता है जवान की शहादत पर, घङियाली आशूँ क्यों बहाते हो
देश के जो असली हीरो हैं उन्हें हीरो का दर्जा नहीं मिल रहाहै फुल्लङ गानों व झूठी फाइट करने वाले बाॅलीवुड के लोगों को देश का हीरो करार दिया जा रहा है जो बेहद निंदनीय है
सुनो हीरो का मतलब वीर होता है
तो वीर सैनिक है या फिल्म एक्टर
मेरा सभी भारतीयों से निवेदन है अपने फोन के वाॅलपेपर पर सैनिक की फोटो लगाए न कि फिल्म एक्टर की
सैनिकों के बोल...
हम तो सो गए
भारत माँ की गोद में
बेटा रो रोकर राह ताकता
रहा मेरी फिर,
रोते हुए वो भी सो गया
अपनी विधवा माँ की गोद में,
माँ-पत्नी और बहनें तङपती हैं
चिल्लाती हैं अपने इकलौते की
शहादत में,
पिता फफकता रह जाता है
बुढापे के सहारे
अपने लाडले की
याद में,
और नेता संवेदना व्यक्त कर
भूल जाते हैं सैनिकों को अपने ऐसो
आराम के इंतजाम में,
~ शिवम यादव अन्तापुरिया
युवा कवि/लेखक
!!सरस्वती वन्दना!!
प्रातः काल
*सरस्वती वन्दना*
*.........................*
शुभ प्रभाते सरस्वती
दर्शनम् अहं करोति,
संसारम् वन्दनम् करोति
त्वम चरणं नवायम् शीश
हे! वीणावरवादिनी
स्वीकारोक्ति मम् प्रथम प्रणामि,
*..:.:.:.:.:.:.:.:.:.:*
* .:::::::::::::::::*
शिवम यादव रामप्रसाद सिंह "आशा"
"अन्तापुरिया"
की
लेखनी से
किसान दुर्दशा
हाँफ कर भी श्वाॅस लेता है
सब उगाकर भी
भूखा सोचता है,
मन उमङता है,
चिल्लाता है,
खुद को समझाता भी है,
क्योंकि सुनाने के लिए
कोई पास नहीं होता है
जिंदगी की दौङ में
दौङकर भी सबसे
पीछे रहता है,
हाँ हाॅफ कर भी श्वाॅस लेता है ।
पानी की जगह
तपती धूप में
खून को पसीना
बनाकर बहाता है,
जरा सी प्रकृति की मार में
वो अपने हाथों में
कुछ नहीं बचा पाता है,
हे भगवान! पूँछता हूँ आपसे
क्यों होती किसानों
की दुर्दशा है
जबकि सारा संसार
उन्हीं पर टिका है
हाॅफ कर भी श्वाॅस लेता है ।।
युवा लेखक/कवि
शिवम यादव अन्तापुरिया
Sunday, December 9, 2018
"सुनो मेरी रनियाँ"
कैसन लागी मेरे इश्क की झङियाँ ।
सुनो मेरी रनियाँ-सुनो मेरी रनियाँ ।।
प्यार में तेरे मर मिट जाएँ
बिना तुहरे हम जी भी न पाएँ,
कब तू बनैलू हमरी दुल्हनियाँ-2
सुनो मेरी रनियाँ-सुनो मेरी रनियाँ......
बफाई मेरे रंग रंग में बसी है
तेरे बिना जीना न जिंदगी है..
तेरे बिना कैसे लूँ अंगडाइयाँ-2
सुनो मेरी रनियाँ-सुनो मेरी रनियाँ....
प्यार मेरा लिए बैठा इश्क की कहानियाँ
तू अनजान क्यों बने मेरी रनियाँ..
सुनो मेरी रनियाँ-सुनो मेरी रनियाँ...
कैसन लागी मेरे इश्क की झङियाँ ।
सुनो मेरी रनियाँ-सुनो मेरी रनियाँ ।।
लेखक/कवि/शायर
शिवम यादव अन्तापुरिया
Thursday, December 6, 2018
2..."इश्क है उसे"
46-खाँमखाँ प्यार में
इश्क की आङ में
धोखा देने में वो
तुमको कामयाब हो गया,
47-इश्क पर इश्क में ऐसे ही नहीं मैनें लिखा है
इश्क में हजारों दफा मुझे धोखा भी मिला है,
48- वो समझता मैं उसके इश्क का
प्यासा अब भी हूँ
साहब!
हम तो भूल भी गए हैं
उससे कब इश्क किया था मैंने,
49- इश्क में न जाने कितने
आशियानें खाक हो गए
हजारों नजरें छुपाकर
वो हमारे हो गए,
50-हँसकर उसका मेरे पास आना
नंगे पाँव दौङकर आना
इससे साबित होता
वो मेरी दीवानी है,
51-ये इश्क है क्या
जो कभी तन्हाँ क्यों नहीं
रहता है
फिर ये दो लोगों को बिछङ
क्यों जाने देता है,
52-इश्क में रात छोटी भी बङी
लगती है
जब बङी होती है
तब तो तन्हाइयाँ ही तन्हाइयाँ
होतीं हैं,
53-जब दिल से इश्क का खेल
हर कोई खेल लेता है
फिर ये राष्ट्रीय खेल घोषित
क्यों नहीं होता है,
54-चलो इश्क पर गम का
पहरा लगा दें या
गम पर ही इश्क का
पहरा लगा दें,
55-मेरा इश्क से यूँ ही नाता
नहीं हो गया है
वर्षों तङपा हूँ
तब जाकर वो मेरा हुआ है,
56-इश्क की दुनियाँ रंगीन
सी लगती है
इश्क मिलकर खो जाए
तो जिंदगी गमगीन
सी लगती है,
57-खासकर जब अपना
दोस्त ही धोखा देता है
ज्यादातर इश्क में भी
ऐसा ही होता है,
58-हाँ तारीफ करता हूँ
उसकी जो मेरे बिन न रहती थी
न जाने क्या हो गया उसको
अब मुझे दुश्मन समझती है,
59-वो इश्क की गली से
मैं गुजरा ही कब था
फिर भी मुझे उसने
इतने प्यार से देखा क्यों था,
60-वो दरम्याँ गुजर गए
इश्क से बेकरार होकर
हम भी बिगङ से गए
प्रेम में मशगूल होकर,
61-हर वक्त मोहब्बत का
घूँट पीकर जिंदा हूँ
मगर ऐसे इश्क में जिंदा
भी मुर्दा हूँ,
62-इश्क में हजारों यादें
दफन सी हो गईं
वो जी तो रहा है
मगर उम्मीदें तो
कफन सी हो गईं,
63-मुझे कुछ शायर भी
कायर से नजर आने लगे हैं
क्योंकि अब इश्क से धोखे
भी हाथ मिलाने लगे हैं,
64-वो इतना इश्क क्यों
कर बैठा था मुझे
अब प्यार में इश्क के
पत्थर क्यों मारने लगा मुझे,
65-अपनाए इश्क जिसको
जिंदगी वो सफल हो गई
न मिले इश्क उसकी सूनी
राहें हो गईं,
66-इश्क के रोग का सिला
भारी बीमारी है
जिसे हुआ नहीं उसका
संघर्ष जारी है,
67-तूफानों को दरकिनार
करते जाएँगे
मोहब्बत में उनके पथ
हम बनते जाएँगे,
68-ओ जिंदगी अब इतना
परेशाँ न कर
मैं हार, थककर बैठने
वाला भी नहीं,
69-हर मंजिल में इश्क
की भरपाई करनी है
जो मुझसे नाराज है
उनकी परेशानी सुननी है,
70-इश्क की पीढा बहुत ही
असहनीय होती है
साहब!
इसमें कोई दवा भी काम
नहीं आती है,
71-मोहब्बत क्या है
प्यार क्या है
बुरा तो तब लगता है
जब कोई इश्कजादा ही
पूछे ये इश्क क्या है?
72-इश्क करना या बङा
जुर्म करना
दोनों एकसमान ही है
साहब!
दोनों में साधारण बेल नहीं मिलती,
73-इश्क की दफा बहुत बङी
होती है साहब!
इश्क के केश में उसकी आँखों में
कैद हूँ
बेल डाली थी फिर भी बेल(जमानत)
नहीं दी उसने,
74-आज मैंने इश्क के उसके सारे
खत जला दिए
हाँ अब उसका दिल से नाम तक भी
हम भुला दिए,
75-इश्क मरहम और जखहम दोनों लगता है
बफाई में मरहम और बेवफाई में जखहम
लगता है,
76-अरे नादाँ दिल तू मेरी मोहब्बत से
वाकिफ नहीं
मैं शांत जल हूँ कोई तूफाँ नहीं,
77-लाखों पहरे इश्क नाकाम कर
देता है
जिसे इश्क से इश्क हो
वो दुनियाँ में नाम कर देता है,
78-इश्क क्वाँरा सा लगता है
मगर वो क्वाँरा नहीं
हुए हैं लाखों निकाह
पर एक भी पूरा नहीं,
79-उसने कहा था कुछ भी हो मेरी
मोहब्बत को दिल में सलामत रखना
मैं ये भी न कर सका इतना
बेवफा निकला !,
80-नजरें झुका करके आँखों में
आँशुओं को सुखा लेता हूँ
दोष उसका नहीं मैं खुद को
भी सता लेता हूँ,
81-इश्क है उसे तो इश्क से
इश्क की सिफारिश क्या
ये जो मजहबी हैं
वो इश्क करना जानें ही क्या,
82-हकीकत ये है इश्क
जुमलों में नहीं पलता
इसमें वादे निभाने पङते हैं
सिर्फ वादों से काम नहीं चलता,
83-इश्क भीङ भरी आवादी
का शहर है
और हाँ गाँवों में
तो मोहब्बत भी शहर है,
84-साहब!
हम वो देहाती हैं इश्क जो
करते हैं तो आर-पार तक की
लङाई लङते हैं
नहीं तो इश्क का नाम
सपने में भी न लेते हैं,
85-मोहब्बत से सींचा हुआ बगीचा
गम ने पल भर में उजाङ दिया
उसे क्या पता ये सब
मेरे दिल ने ही है किया,
86-ओ इश्क तेरे अहसान अपनी
जिंदगी के नाम करते हैं
अब कभी तेरी जरूरत न पङे
इसलिए तेरे खिलाफ बयान करते हैं,
87-आज अतीत में लौटा तो पाया
कि वो मेरे खिलाफ न थी
मैं था इश्क से अनजान
वो (अब नहींहै) मेरे लिए ही जीती थी,
88-इश्क की समय सीमा किसी
ने समझ न पाई
मोहब्बत की कोई ने
कर ही न पाई भरपाई,
89-दिल का खेल लोग अब
दिल से नहीं प्लास्टिक के
खिलौनों की भाँति खेलने लगे हैं
एक टूटा नहीं दूसरा खरीद कर
लाने लगे हैं,
90-ये इश्क है इसका सफर
ऐसे तय न कर पाओगे
जब तक खुद को प्रेम की
ज्वाला में न जलाओगे,
~ शिवम यादव "अन्तापुरिया"
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