I am a Poet & Writer . मैं काव्य-संग्रह और मुक़्तक लिखता हूँ I मुझे लिखने में मज़ा आता है , धन्यबाद I
Wednesday, July 27, 2022
महान कैसे मान लूँ
_जिनके ह्रदय में अब वासना हो काम की_
_उनके दिखावे को प्रेम कैसे नाम दूँ_
_जिनके दिखावे में हो अश्लील चित्र हार_
_उनके साहस को महान कैसे नाम दूँ_
_राष्ट्र के बचाव में जिनसे उठे न ढाल_
_उनके हाथ में तलवार कैसे मान लूँ_
_चूमते रहे जो सदा प्रेयसी के मस्तकों को_
_आज उन्हें युद्ध में महान कैसे मान लूँ_
_शिवम अन्तापुरिया_
प्रेम की भाषा नहीं
_मान लो आँखों में मेरी है प्रेम की भाषा नहीं_
_है मगर दिल में जो मेरे उस देश की परिभाषा नहीं_
_तुम-तुम -तुम सब प्रेम पर मरकर प्रेम को परिभाषित करो_
_है मगर मेरी गुलामी की यहाँ आदत नहीं_
_शिवम यादव "अन्तापुरिया"_
कौन ईमानदार है
किसान ऋण न चुका पाए तो आत्महत्या करता है। बल्कि उद्योगपति विदेश भाग जाता है इसमें ईमानदार कौन हुआ...
ऐसे गरीबी दूर की बात है
मात्र रोटी,कपड़ा और मकान मिलने से ही गरीबी दूर नहीं हो सकती है
जब तक कि व्यक्ति के अच्छे स्वास्थ्य की जिम्मेदारी उस पर ही नहीं होगी
- शिवम अन्तापुरिया
नैतिकता
नैतिकता के कदम उठाना,
इस जग में सबसे भारी है।
उठ गए कदम नैतिकता पर तो,
समझो परिवर्तन जारी है।।
- शिवम यादव "अन्तापुरिया"
दूसरों से लड़ने पहले
_दूसरों से लड़ने से पहले अगर खुद से लड़ना सीख ले मानव तो वो जल्द ही इंसान की श्रेणी में आ जाएगा ।_
_अन्तापुरिया_
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