I am a Poet & Writer . मैं काव्य-संग्रह और मुक़्तक लिखता हूँ I मुझे लिखने में मज़ा आता है , धन्यबाद I
Monday, June 8, 2020
बेटियाँ क्यों बोझ
सदा क्यों बेटियों को लोग
बनाए बोझ रहते हैं
जबकि बेटियों के बिन
सदा घर शून्य रहते हैं
शिवम अन्तापुरिया
साथ-साथ आप सब भी अच्छे दौर से गुजरते रहे
शिवम अन्तापुरिया
पता है क्या अभी तुमसे मोहब्बत मैं नहीं करता
जरा सी याद में तेरी मैं खुद से अब नहीं लड़ता
तेरे चंचल ये नैनों की छठा जब से दिखाई दी
हाँ अक्सर याद से तेरी मेरा अब दिल नहीं डरता
सब कुछ बयाँ बेबयाँ हो गया
संग उसके भी कुछ अब नया हो गया
~ शिवम अन्तापुरिया
हर बात अलग ही रहती है
उसकी हर बातें सुर्खियों में रहती हैं
~ शिवम अन्तापुरिया
पाकिस्तान मैत्री रखो
मैत्रीय सम्बन्ध रखो
पाकिस्तान शांतिप्रिय बनो
फ़ौज अपनी हटाओ तुम
फ़ौज अपनी हटाएँ हम
हाथ दोनों मिलाकरके
दुनियाँ को दिखाए हम
शिवम अन्तापुरिया
पाकिस्तान ले लेगा
तेरी हसरत रही थोड़ी ओ थोड़ी और दे देना
रहे गर जान जब तक ये हमें पहचान दे देना
*पाक ए दिल में बसता है शिवम को जान लो अब तुम*
*किसी भी बात को लेकर ये पाकिस्तान ले लेगा*
मैत्रीय सम्बन्ध रखो
पाकिस्तान शांतिप्रिय बनो
फ़ौज अपनी हटाओ तुम
फ़ौज अपनी हटाएँ हम
हाथ दोनों मिलाकरके
दुनियाँ को दिखाए हम
सुनाएँ शांति वार्ता को
सुनाएँ शान्त गीतों में
सुनना यूँ जरूरी है
सुनाना भी जरूरी है
किसी के जख्मों से जखम
कभी हैं भर नहीं जाते
अधर में छोड़ कर उसको
कभी हैं हम नहीं जाते
हाथ अब तुम बढा़ओ गर तो
मैत्रीयता को निभाते हैं हम
ये छुटपुट बातें तो घर में
सदा होती ही रहतीं हैं
जरा सा अब भुलाओ तुम
जरा सा अब भुलाएँ हम
किसी की भूमि ही ये है
किसी की मातृभूमि है
सोचना एक ही है अब
क्यों करते गोदें सूनी हैं
ये सारा आसमाँ तेरा
ये सारी मिट्टी भी तेरी
एक कण ले न जाओगे
भले कह डालो तुम सारा
ये सब विश्व है मेरा
~ शिवम अन्तापुरिया
कानपुर उत्तर प्रदेश
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