- शिवम अन्तापुरिया
I am a Poet & Writer . मैं काव्य-संग्रह और मुक़्तक लिखता हूँ I मुझे लिखने में मज़ा आता है , धन्यबाद I
Wednesday, July 27, 2022
लक्ष्य कैसा हो
जो व्यक्ति अपने साहस,व्यक्तित्व और अपने लक्ष्य का प्रकीर्णन नहीं होने देता है।
वही व्यक्ति आगे चलकर अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है।।
_शिवम यादव "अन्तापुरिया"_
क्या है अराजकता
जिस बिंदु पर आकर कानून व्यवस्था खत्म हो जाती है।
उसी बिंदु से अराजकता शुरू हो जाती है।।
~ शिवम यादव "अन्तापुरिया"
फ़िर भी पता नहीं कहाँ से up cm योगी जी कहते हैं कि
जनसंख्या की वृद्धि से अराजकता जन्म ले लेगी
अपनों ने
यदि अपनों ने अपनों से लड़कर अपमान नहीं पाला होता
तो भारत में अंग्रेजों को शासन करना आसान नहीं होता
चक्र-कुचक्रों से न विघटित होकर यदि युद्ध लड़े होते हमने
तो गुलाम नहीं होता भारत इतिहास भले छोटा होता
शिवम यादव अन्तापुरिया
पुरुष स्त्री प्रेम
पुरुष प्रेम स्त्री पर बरसाते हैं जब खुद खुशियों में डूबे हों
"स्त्री प्रेम सदा बरसाती रहती सहज-सरल बन"
जब पुरुष कष्ट से घिरे खड़े हों
~ @OshayarShivam
Sunday, October 24, 2021
संघर्ष चुनना पड़ेगा
" संघर्ष चुनना पड़ेगा "
वो कठिन पथ सामने थे
जिन पर था चलना मुझे
हम भरे आशाओं से थे
जल मगन से हो चुके
कुछ बड़े संघर्ष करके
पा लिए थे लघु राह हम
उन लघु राहों में चलकर
अब कर रहे थे संघर्ष हम
जीवन में संघर्ष गाथा
है सदा आती उन्हीं के
जो निरंतर चल रहे हैं
बिन डरे तूफ़ाँ-आँधी से
हम नहीं हैं जीत सकते
संघर्ष के किस्सों से डरकर
हैं सदा जीते वही जो
आए हैं मुश्किलों से लड़कर
अब जीत गर पानी तुम्हें है
तो संघर्ष को चुनना पड़ेगा
हाँ डर गए संघर्ष से जो तुम
तो बिन नाम के मरना पड़ेगा
संघर्ष की लाखों हैं गाथा
एक आध को पढ़ना पड़ेगा
तुमने नहीं गाथा पढ़ी जो तो
निराशा में ही जीना पड़ेगा
यहाँ जीवन धरा पर जी रहे हो
निश्चित मौत से मिलना पड़ेगा
छोड़ना चाहते हो यश धरा पर
तो संघर्ष को ही चुनना पड़ेगा
शिवम अन्तापुरिया
कठिन नैया
" कठिन नैया "
जीवन की कठिन नैया का
बनता कोई पतवार नहीं
मुश्किलों से घिरी हो जिंदगी
तब होता कोई परिवार नहीं
चारों तरफ़ हम हैं, तुम्हारे हैं
ऐसे लगे मेले नज़र आते रहे
जब मुश्किलों ने जकड़ा मुझे
साफ़ चौराहे नज़र आने लगे
ये जिंदगी के हर कदम पर
मुश्किलों ने ही चाहा मुझे
जिंदगी मरकर हँसने लगी
तब लोगों ने सराहा मुझे
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